
इंडोयूजी कॉमर्स एंड सोशल काउंसिल के चेयरमैन फिरोज़ खान एफके ने भारत सरकार के कोयला मंत्रालय को एक महत्वपूर्ण सुझाव पत्र भेजा है। इस पत्र में देश के कोयला क्षेत्र को और अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाने के लिए कई व्यावहारिक सुझाव दिए गए हैं।
अपने पत्र में फिरोज़ खान एफके ने सबसे पहले कोयला मंत्रालय की सराहना की। उन्होंने कहा कि मंत्रालय ने पिछले कुछ वर्षों में कोयला क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने, व्यावसायिक कोयला नीलामी को मजबूत बनाने और देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सराहनीय कार्य किए हैं।
उन्होंने कहा कि कोयला केवल एक खनिज नहीं, बल्कि देश की अमूल्य राष्ट्रीय संपत्ति है। कोयले की चोरी या अवैध ढुलाई से केवल सरकार का ही नहीं, बल्कि पूरे देश और जनता का नुकसान होता है।
फिरोज़ खान एफके ने मंत्रालय को सुझाव दिया कि पूरे देश में “नेशनल कोल सिक्योरिटी एंड ट्रांसपेरेंसी मिशन ” शुरू किया जाए, ताकि कोयला चोरी पर प्रभावी रोक लगाई जा सके और कोयला नीलामी प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाया जा सके।
फिरोज खान एफके ने मंत्रालय को लिखे पत्र में लिखा कि कोयले की नीलामी प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने की जरूरत है।
खदान से अंतिम स्थान तक कोयले की GPS और डिजिटल तकनीक से निगरानी करने की आवश्यकता है। कोयला चोरी रोकने के लिए एआई कैमरे और ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीक का उपयोग करना उचित रहेगा। उन्होंने आगे लिखा कि आम नागरिकों के लिए कोयला चोरी की सूचना देने के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन और पुरस्कार योजना शुरू करने से चोरी रोकी जा सकती है। कोयला मंत्रालय, रेलवे, पुलिस, सीआईएसएफ और राज्य सरकारों के बीच रियल-टाइम निगरानी प्रणाली बनाने पर फिरोज खान एफके ने जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने समय-समय पर स्वतंत्र ऑडिट कराकर पूरी व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाने की भी बात कही।
इस संदर्भ में फिरोज़ खान एफके ने कहा:”कोयले की चोरी केवल कोयले की चोरी नहीं है, बल्कि यह देश की राष्ट्रीय संपत्ति की चोरी है। कोयले का हर एक टन जो चोरी होता है, उससे देश की अर्थव्यवस्था, सरकारी आय और विकास को नुकसान पहुंचता है।”
उन्होंने यह भी कहा कि इंडोयूजी कॉमर्स एंड सोशल काउंसिल इस विषय पर मंत्रालय के साथ मिलकर विस्तृत सुझाव, जागरूकता अभियान और आवश्यक सहयोग देने के लिए हमेशा तैयार है।
फिरोज़ खान एफके ने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार, उद्योग, कानून लागू करने वाली एजेंसियों और आम नागरिकों के संयुक्त प्रयास से कोयला चोरी पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है और देश की राष्ट्रीय संपत्ति की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।